Madhya Pradesh Gyan Sabha 2082

Madhya Pradesh Gyan Sabha 2082

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, भोपाल
एवं
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली

के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय

मध्यप्रदेश ज्ञान सभा वि.सं.-२०८२

स्वर्णिम युग की ओर विकसित भारत २०४७

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति- क्रियान्वयन, संभावनाएं एवं चुनौतियाँ”

मुख्य अतिथि

डॉ. मनमोहन वैद्य

अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

स्थान

वैष्णव विद्या परिसर, साउथ राजमोहल्ला, इंदौर, म.प्र.

तिथि

माघ शुक्ल पक्ष दशमी एवं एकादशी, विक्रम संवत २०८२

दिनांक

28 जनवरी 2026, बुधवार (विद्यालयीन शिक्षा)
29 जनवरी 2026, गुरुवार (उच्च शिक्षा)
समय
प्रथम दिवस- प्रातः 10:30 से सांय 4:30 तक
द्वितीय दिवस -प्रातः 10:30 से सांय 5:30 तक

मुख्य संरक्षक

डॉ. अतुल कोठारी

राष्ट्रीय सचिव

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली

श्री पुरुषोत्तमदास पसारी

कुलाधिपति

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर

प्रो. खेमसिंह डहेरिया

सभापति

मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय
विनियामक आयोग, भोपाल

संरक्षक

श्री कमलनारायण भुराड़िया

प्रतिकुलाधिपति

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर

प्रो. (डॉ.) योगेश चंद्र गोस्वामी

कुलगुरु

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर

श्री वैष्णव ट्रस्ट- परिचय

वैष्णव संप्रदाय के दयालु एवं समाजसेवी वस्त्र व्यवसाइयों द्वारा स्थापित श्री वैष्णव सहायक कपड़ा मार्केट कमेटी, इंदौर सद्भाव, साधुभाव एवं सात्विकता की भावना से प्रेरित एक प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था है, जिसके द्वारा वर्ष 1884 में श्री वैष्णव समूह संस्थानों की नींव रखी गई। यह पहल समाज सेवा, शिक्षा और परमार्थ को समर्पित थी। बाद में, वर्ष 1934 में इसका नाम परिवर्तित कर श्री वैष्णव सहायक कपड़ा मार्केट कमेटी रखा गया। श्री वैष्णव विद्यापीठ ट्रस्ट का मूल विश्वास है देश की प्रगति नागरिकों के जीवन-स्तर में सुधार से जुड़ी है। इसी दृष्टि से यह ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते हुए समाज के सभी वर्गों के कल्याण हेतु समर्पित है। ट्रस्ट का उद्देश्य लाभ अर्जन नहीं, बल्कि शिक्षा एवं अनुसंधान के माध्यम से समाज और राष्ट्र का उत्थान है। वर्ष 1981 में श्री वैष्णव सहायक कपड़ा मार्केट कमेटी के मार्गदर्शन में श्री वैष्णव शैक्षणिक एवं परमार्थिक न्यास की स्थापना की गई। तब से यह न्यास तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, विद्यालय संचालन तथा विविध सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज सेवा में निरंतर सक्रिय है।

श्री वैष्णव समूह द्वारा संचालित संस्थान

विद्यालय-
  • • श्री वैष्णव हायर सेकेंडरी स्कूल (1951)
  • • श्री वैष्णव बाल मंदिर (1981)
  • • श्री वैष्णव कन्या विद्यालय (1992)
  • • श्री वैष्णव एकेडमी (1993)
महाविद्यालय एवं संस्थान-
  • • श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ कॉमर्स (1967)
  • • श्री वैष्णव पॉलिटेक्निक (1960)
  • • श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (1987)

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय एक निजी विश्‍वविद्यालय है, जिसकी स्थापना वर्ष 2015 में मध्य प्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम के अंतर्गत इंदौर (भारत) में की गई। इस विश्‍वविद्यालय की स्थापना मानवता के लिए बेहतर भविष्य के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के माध्यम से नेतृत्व प्रदान करने की दृष्टि से की गई है। विश्‍वविद्यालय का मिशन सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिकों का विकास कर वैश्विक समाजों की सतत प्रगति में सकारात्मक योगदान देना है। मूल्य आधारित शिक्षा को सर्वोपरि मानते हुए, विश्‍वविद्यालय सहनशीलता, उत्कृष्टता, निष्पक्षता, ईमानदारी एवं पारदर्शिता को अपने मूल मूल्यों के रूप में बढ़ावा देता है।

विश्‍वविद्यालय के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • उच्च शिक्षा में शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रदान करना तथा अनुसंधान, ज्ञान के विकास और उसके प्रसार की व्यवस्था करना।
  • अपनी शैक्षणिक सेवाओं में विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करना एवं उच्च स्तर की बौद्धिक क्षमताओं का विकास करना।
  • ज्ञान के साझा उपयोग एवं उसके अनुप्रयोग हेतु अनुसंधान एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना करना।

विश्‍वविद्यालय निम्नलिखित संघटक संस्थानों के माध्यम से विभिन्न विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर, द्वेत उपाधि तथा डॉक्टरल (पीएच.डी.) कार्यक्रम संचालित कर रहा है:

  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन्स
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़,
    मास कम्युनिकेशन, ह्यूमैनिटीज़ एंड आर्ट्स
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज़्म
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी
  • श्री वैष्णव स्कूल ऑफ मैनेजमेंट
  • श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर
  • फैकल्टी ऑफ डॉक्टरल स्टडीज़ एंड रिसर्च

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास: परिचय

"देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलो" "माँ, मातृभूमि, मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं"

5 अगस्त 1947 को यूनियन जैक के स्थान पर तिरंगा फहराया गया, परंतु देश की विभिन्न व्यवस्थाओं में, शिक्षा सहित, किसी भी प्रकार का मूलभूत बदलाव नहीं किया गया। देश की शिक्षा व्यवस्था एक आधारभूत विषय है। स्वतंत्रता के बाद अपेक्षा थी कि देश की शिक्षा का स्वरूप भारतीय दृष्टिकोण से, अपनी आवश्यकता के अनुरूप होगा, परंतु ऐसा नहीं हुआ।

देश की अधिकांश समस्याओं की जड़ देश की दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था है। इसलिए शिक्षा में परिवर्तन प्राथमिकता का विषय होना चाहिए। इसी हेतु 2 जुलाई 2004 को ‘शिक्षा बचाओ आन्दोलन’ प्रारम्भ किया गया। इसके माध्यम से देशभर में शिक्षा के पाठ्यक्रम में व्याप्त विकृतियों के विरुद्ध आन्दोलन चलाया गया।

यह आन्दोलन मात्र छोटी-मोटी गलतियों के सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने देश की भाषा, धर्म, संस्कृति, महापुरुषों एवं परम्पराओं को अपमानित करने के लिए चलाए जा रहे षडयंत्रों को बेनकाब कर उन्हें रोकने हेतु किया गया एक सफल एवं सार्थक प्रयास है। शिक्षा में आधारभूत परिवर्तन तथा देश की शिक्षा को एक नया विकल्प देने के उद्देश्य से 24 मई 2007 को ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ का गठन किया गया। देश की शिक्षा अपनी संस्कृति, प्रकृति एवं प्रगति के अनुरूप बने—इस हेतु न्यास द्वारा विभिन्न विषयों पर कार्य प्रारम्भ किए गए हैं, जो इस प्रकार है—चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास व मूल्यपरक शिक्षा ,वैदिक गणित, पर्यावरण शिक्षा, शिक्षक शिक्षा, शिक्षा में स्वायतत्ता, प्रकल्पः प्रतियोगी परीक्षा, प्रबंधन शिक्षा, शोध प्रकल्प, तकनीकी शिक्षा, इतिहास शिक्षा की भारतीय दृष्टि, भारतीय ज्ञान परम्परा| उक्त कार्य तीन आयामों 1. भारतीय भाषा अभियान 2. भारतीय भाषा मंच 3. शिक्षा स्वास्थ्य न्यास तथा तीन कार्य-विभागों 1. प्रकाशन कार्य 2. प्रचार-प्रसार कार्य 3. महिला कार्य के साथ निरंतर कार्यरत है|

शिक्षा बचाओ आन्दोलन को मूर्त संस्थानिक एवं सृजनात्मक स्वरूप प्रदान करते हुए 2 जुलाई, 2004 को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का गठन किया गया| न्यास के ध्येय वाक्य हैं कि "समस्या नहीं, समाधान की चर्चा करो" एवं "देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलना होगा". न्यास का गंभीरता से मानना है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य मनुष्य के चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास है| इसी ध्येय के साथ न्यास ने अपने आधारभूत विषय के रूप में शिक्षा में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास को बल देने का कार्य आरंभ किया|

तदुपरांत भारत की शिक्षा भारत की संस्कृति, प्रगति एवं प्रकृति के अनुरूप हो इस उद्देश्य के साथ कार्य विस्तार क्रमिक रूप से होता गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संस्थापक श्री स्व. दीनानाथ बत्रा हैं जो विद्या भारती के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। न्यास का घोषित लक्ष्य वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की वैकल्पिक व्यवस्था की स्थापना करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये न्यास शिक्षा के पाठ्यक्रम, प्रणाली, विधि और नीति को बदलने तथा शिक्षा के 'भारतीयकरण' को आवश्यक मानता है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा को उसकी मूल संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों से पुनः जोड़ना है। न्यास इस विचार पर आधारित है कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, अपितु व्यक्ति का सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है।

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय , इंदौर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, न्यास ऐसे शैक्षणिक संस्थानों एवं शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करता है, जो भारतीय दृष्टिकोण आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाएँ। शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज के बीच संवाद स्थापित कर शिक्षा को सांस्कृतिक आत्मबोध का केंद्र बनाने का यह एक सतत प्रयास है।

अंततः शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की दृष्टि स्पष्ट है- “भारतीय चिंतन और मूल्यनिष्ठ जीवन पर आधारित ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण, जिससे भारत पुनः ज्ञान, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का पथप्रदर्शक बन सके।”

ज्ञान सभा- उद्देश्य एवं वैचारिक आधार

भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य सदैव व्यक्ति के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना रहा है। ऐसी शिक्षा जो जीविकोपार्जन तक सीमित न होकर मानव के शरीर, मन, बुद्धि, हृदय और आत्मा के संतुलित विकास को साधे, वही सच्चे अर्थों में समग्र एवं सार्थक शिक्षा कहलाती है। भारतीय परंपरा में शिक्षा को जीवन का आधार माना गया है, जो व्यक्ति को केवल दक्ष, संस्कारित, संवेदनशील और आत्मबोध से युक्त नागरिक बनाती है।

प्राचीन भारत की गुरुकुल परंपरा इस समग्र शिक्षा की द्योतक रही है। प्राचीन भारत की गुरुकुल शिक्षा जीवन जीने की कला सिखाती थी। विद्यार्थी गुरु के सान्निध्य में रहकर अनुशासन, विनम्रता, सेवा, आत्मसंयम, सहअस्तित्व और नैतिक मूल्यों का अभ्यास करते थे। वेद, उपनिषद, शास्त्र और दर्शन के साथ-साथ कृषि, धनुर्विद्या, गणित, खगोल, संगीत, योग, आयुर्वेद एवं शिल्प जैसी जीवनोपयोगी विद्याओं का भी समावेश शिक्षा का अभिन्न अंग था। इस प्रकार शिक्षा व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाती थी।

भारतीय दर्शन के अनुसार शिक्षा का लक्ष्य मानव के पाँच कोशों “अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय” का संतुलित विकास है। जब शिक्षा इन पाँचों स्तरों पर व्यक्ति का विकास करती है, तभी वह पूर्ण मानव निर्माण की ओर अग्रसर होती है। सत्य, अहिंसा, करुणा, सहयोग, कर्तव्यबोध और आत्मनिष्ठा जैसे मूल मूल्य भारतीय शिक्षा की आत्मा हैं, जो समाज में समरसता और राष्ट्र में सुदृढ़ता का आधार बनते हैं।

औपनिवेशिक काल में शिक्षा का स्वरूप संकीर्ण होकर मुख्यतः रोजगारोन्मुख बन गया। शिक्षा का उद्देश्य प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित हो गया, जिससे भारतीय जीवन-मूल्य, सांस्कृतिक चेतना और आत्मिक विकास की उपेक्षा हुई। परिणामस्वरूप शिक्षा ज्ञान के बजाय सूचना का माध्यम बन गई और व्यक्तित्व निर्माण का पक्ष कमजोर होता चला गया।

भारतीय दृष्टि में शिक्षा का ध्येय सदैव “सा विद्या या विमुक्तये” रहा है—अर्थात् विद्या वही है जो बंधनों से मुक्त करे। कालांतर में यह अवधारणा केवल बौद्धिक प्रशिक्षण और अंकों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित होती गई। आज के युग में, जब भौतिक प्रगति के साथ सामाजिक तनाव, नैतिक पतन और मानसिक असंतुलन बढ़ रहा है, तब शिक्षा को पुनः अपने मूल वैचारिक और सांस्कृतिक आधार से जोड़ने की आवश्यकता और अधिक प्रासंगिक हो गई है।

इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) एक सार्थक एवं दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आती है। यह नीति भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक आवश्यकताओं के साथ समन्वित करते हुए सृजनशीलता, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिकता, कौशल विकास, योग, पर्यावरण चेतना और जीवन कौशल को समान महत्व देती है।

ज्ञान सभा का उद्देश्य भारतीय शिक्षा दर्शन को पुनः जागृत करना, शिक्षकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और समाज के प्रबुद्धजनों को एक साझा वैचारिक मंच प्रदान करना है। जहाँ भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और वर्तमान शैक्षिक चुनौतियों पर गंभीर चिंतन एवं संवाद हो सके। ज्ञान सभा का लक्ष्य केवल विमर्श नहीं, बल्कि शिक्षा को जीवन, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है।

स्वर्णिम युग की ओर विकसित भारत 2047

"विकसित भारत @ 2047" का दृष्टिकोण भारत को स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है जो आर्थिक रूप से सशक्त, सामाजिक रूप से समावेशी, सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली तथा तकनीकी रूप से अग्रणी हो। इस राष्ट्रीय संकल्प की पूर्ति में क्षेत्रीय विशेषताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्य भारत का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र—विशेषकर इंदौर, उज्जैन, महेश्वर एवं आसपास के आदिवासी अंचल—विकसित भारत के स्वर्णिम युग की दिशा में एक सशक्त आधार प्रदान करता है।
मध्य भारत क्षेत्र प्राचीन काल से शिक्षा, संस्कृति, कृषि एवं अध्यात्म का केंद्र रहा है। उज्जैन की अवंतिका परंपरा, सम्राट विक्रमादित्य की सांस्कृतिक विरासत तथा नर्मदा तट की सभ्यता इस क्षेत्र को विशेष पहचान प्रदान करती है। आज यही परंपराएँ आधुनिक विकास मॉडल से जुड़कर सतत एवं मूल्य-आधारित विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं|

इंदौर स्वच्छता, स्मार्ट सिटी पहल, उद्योग, उच्च शिक्षा एवं स्टार्टअप संस्कृति के माध्यम से नए भारत की शहरी प्रगति का उदाहरण बन चुका है। 2047 के संदर्भ में इंदौर रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार, उद्योग–शिक्षा समन्वय तथा डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
मध्य भारत आदिवासी अंचल सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर हैं। विकसित भारत 2047 के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और कौशल विकास के माध्यम से इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण प्राथमिक लक्ष्य है। साथ ही कृषि में तकनीकी नवाचार, जैविक खेती और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण समृद्धि को गति प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम विवरण

प्रथम दिवस - 28 जनवरी 2026 द्वितीय दिवस - 29 जनवरी 2026
क्षेत्र: विद्यालयीन शिक्षा क्षेत्र: उच्च शिक्षा
स्थान: श्री वैष्णव विद्यापीठ कार्यालय परिसर,
राजमोहल्ला, इंदौर
स्थान: श्री वैष्णव विद्यापीठ कार्यालय परिसर,
राजमोहल्ला, इंदौर
समय: प्रातः 10:30 से सांय 4:30 तक समय: प्रातः 10:30 से सांय 5:30 तक
मुख्य उद्देश्य मुख्य उद्देश्य
विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में विद्यालयीन शिक्षा/
शिक्षक/विद्यार्थियों/पालको एवं समाज की भूमिका
विकसित भारत 2047 के लिए उच्च शिक्षा में
अनुसंधान,नवाचार एवं उद्यमिता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं कौशल आधारित शिक्षण, खेल-खेल
में शिक्षा
वैश्विक प्रतिस्पर्धा हेतु छात्र तैयारी
मानवीय मूल्यों व भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षण
प्रतिमान
भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित उच्च शिक्षा प्रणाली का
संवर्धन
शिक्षा में मातृभाषा का समावेश शिक्षा को व्यवसायिक एवं व्यावहारिक स्वरूप प्रदान
करना
ज्ञानसभा की पद्धति
सम्पूर्ण सम्मेलन का प्रारूप खुली चर्चा के साथ विषय विशेषज्ञ द्वारा व्याख्यान, चर्चाएँ, अलग विषय पर समान्तर सत्र, समूह कार्य, समूह चर्चा के रूप में होगा।

सुचना एवं कार्यक्रम विवरण

  1. पंजीयन पूर्णतः निःशुल्क है।
  2. संस्थाओं में किए गए नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। अतः संस्थाएँ अपने प्रयोगात्मक कार्यों की प्रविष्टि दिनांक 20 जनवरी 2026 तक भेजें ताकि प्रदर्शनी के लिए स्थान की व्यवस्था की जा सके।
  3. लेख और शोध पत्र भेजने की अंतिम दिनांक 20 जनवरी 2026 है।
  4. लेख और शोध पत्र Email ID – gyansabha2082@gmail.com पर भेजे।
  5. यह गूगल फॉर्म केवल एक व्यक्ति के लिए ही मान्य है।
  6. इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अपने परिवार के सदस्यों के लिए आवास व्यवस्था स्वयं करना होगी।
  7. आवास व्यवस्था सीमित होने के कारण केवल गूगल फॉर्म के माध्यम से की गई प्रविष्टि ही मान्य होगी ।
  8. कार्यशाला विद्यालयीन शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के लिए पृथक-पृथक दिवसों में आयोजित की जा रही है, अतः कृपया केवल अपेक्षित विषय , दिनांक एवं समय हेतु ही आरक्षण करें।
  9. गूगल फॉर्म तभी भरें जब आप पूरे समय के लिए कार्यक्रम में भाग लेने हेतु पूर्णतः सुनिश्चित हों।
  10. कृपया पानी की स्टील बॉटल, डायरी एवं पेन अपने साथ अवश्य लाएँ।
  11. यह कार्यक्रम पूर्णतः एकल-उपयोग प्लास्टिक से मुक्त है, अतः इस दिशा में आपका सहयोग अपेक्षित है।
  12. गूगल फॉर्म प्रविष्टि की अंतिम दिनांक 20 जनवरी 2026 ।

परामर्श समिति

  1. प्रो. पंकज मित्तल - अध्यक्ष, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली
  2. प्रो. राकेश सिंघई - कुलगुरु, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  3. श्री ओम शर्मा - राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली
  4. सुश्री शोभा पैठणकर - राष्ट्रीय महिला कार्य प्रमुख, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास
  5. प्रो अर्पण भारद्वाज - कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन
  6. डॉ. विनोद भंडारी - अध्यक्ष, श्री ऑरबिंदो ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स इंदौर-उज्जैन
  7. डॉ. भरत व्यास - मध्य क्षेत्र संयोजक, चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली
  8. श्री अतुल सेठ - गुजरती समाज, इंदौर
  9. प्रो. अनिल कुमार मिश्रा - कुलगुरु, श्री ऑरबिंदो विश्वविद्यालय
  10. प्रो. मोहन लालकोरी - कुलगुरु, क्रांति सूर्य टंट्याभील विश्वविद्यालय, खरगोन
  11. डॉ अक्षय कांति बम - अध्यक्ष, इंदौर इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ, इंदौर
  12. प्रो. नितिन राणे - कुलगुरु, अवंतिका विश्वविद्यालय, उज्जैन
  13. प्रो नितेश पु रोहत - डायरेक्टर, एस.जी.एस.आई.टी.एस., इंदौर
  14. डॉ अजय तिवारी - मध्य क्षेत्र संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली
  15. प्रो. राजेश दीक्षित - कुलगुरु, रेनेसॉ विश्वविद्यालय, इंदौर
  16. डॉ. रमेशचंद्र दीक्षित - अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, इंदौर

सलाहकार समिति

  1. श्री अनंत पंवार - कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  2. डॉ. ए.के. द्विवेदी - कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  3. डॉ. वैशाली वाईकर - कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  4. श्रीमती मोनिका गौर - कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  5. श्री अमित खरे - कुलसचिव, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर
  6. डॉ. आनंद मिश्रा - कुलसचिव, श्री ऑरबिंदो विश्वविद्यालय, इंदौर
  7. श्री प्रज्जवल खरे - कुलसचिव, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  8. श्री अनुराग द्विवेदी - उपकुलसचिव, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  9. डॉ मयंक सक्सेना - उपकुलगुरु, सेज यूनिवर्सिटी, इंदौर
  10. डॉ. सत्येंद्र श्रीवास्तव - डायरेक्टर, पारिजात ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स, इंदौर
  11. डॉ. निर्मल डोंगरे - डीन फार्मेसी, सेज विश्ववद्यालय, इंदौर
  12. श्रीमती सुमन कोचर - अध्यक्ष, सहोदय ग्रुप ऑफ़ सी.बी.एस.ई. स्कूल, इंदौर
  13. डॉ. सतीश निरंजनी - सचिव, सहोदय ग्रुप ऑफ़ सी.बी.एस.ई. स्कूल, इंदौर
  14. डॉ राजीव पंड्या - राष्ट्रीय संयोजक शिक्षक शिक्षा, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली
  15. डॉ. आनंद राजावत - डीन एकेडमिक्स, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर
  16. डॉ. नमित गुप्ता - निदेशक, एस व्ही आई टी एस, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर

स्वागत समिति

  1. श्री देवेन्द्र कुमार जी मुछाल - मंत्री, श्री वैष्णव सहायक ट्रस्ट
  2. श्री गिरधरगोपाल जी नागर - मंत्री, श्री वैष्णव शैक्षणिक एवं पारमार्थिक न्यास
  3. श्री राधाकिशन जी सोनी - मंत्री, श्री वैष्णव चैरिटी ट्रस्ट

समन्वयक

  1. श्री रामसागर मिश्र - क्षेत्र सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली- मोबाइल नंबर : 8959376095
  2. डॉ दिनेश दवे - क्षेत्र सह-संयोजक, चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली- मोबाइल नंबर : 9826290034
  3. श्री सुनील पंड्या - प्रांत संयोजक शिक्षक शिक्षा, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली- मोबाइल नंबर : 94256 68606
  4. डॉ. सुप्रज्ञ ठाकुर - प्राध्यापक, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्‍वविद्यालय, इंदौर- मोबाइल नंबर : 9926028213

आयोजन समिति

प्रचार प्रसार एवं मीडिया समिति:
  1. श्री अथर्व शर्मा
  2. डॉ. जफ़र मेहमूद
  3. श्री योगेश रघुवंशी
  4. डॉ. संतोष पटेल
  5. सुश्री रौशनी शर्मा
  6. श्री तरुण पंचोली
  7. डॉ. रुपाली भारतीय
  8. डॉ. सुप्रिया व्यास
  9. डॉ. नवनीता उपाध्याय
  10. श्री लवेंद्र सिंह चौहान
आमंत्रण व्यवस्था:
  1. डॉ. सुधीर सक्सेना
  2. प्रो. कुंभन खंडेलवाल
  3. श्री अमित कुकरेजा
  4. श्री रवि जोशी
  5. डॉ. दिनेश सेठी
  6. डॉ. विशाल पुरोहित
  7. डॉ. श्वेता मिश्रा
  8. डॉ. हरीश शर्मा
पंजीयन, प्रमाण पत्र समिति:
  1. डॉ नीरज सारवान
  2. डॉ. गौरव शर्मा
  3. डॉ. मनोहर चित्रे
  4. डॉ. दिव्या शर्मा
  5. डॉ. एकता गायकवाड
  6. डॉ. नम्रता जैन
  7. डॉ. अस्मिता शर्मा
राष्ट्रीय साहित्य समिति:
  1. श्री नीलेश दवे
  2. डॉ. निकिता दुबे
  3. श्री यशस्वी देवड़ा
  4. श्री संजय पंड्या
  5. डॉ. रूपाली सारये
फ्लेक्स एवं प्रिंटिंग समिति:
  1. डॉ. संदीप कुमार जैन
  2. प्रो. विकास शर्मा
  3. सुश्री अपूर्वा जड़े
शोध एवं आलेख समिति:
  1. डॉ. राकेश ढांड (संयोजक)
  2. प्रो. ममता चंद्रशेखर रायकवार
  3. डॉ. सुब्रतो गुहा
  4. डॉ. अनिल पाटीदार
  5. डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री
  6. डॉ. स्वाति दुबे मिश्रा
  7. डॉ. शीतल जैन
  8. डॉ. रवि वंशपाल
मंच व्यवस्था:
  1. डॉ. स्मृति चिटनीस
  2. डॉ. प्रतिभा यादव
  3. श्री अभिषेक चौहान
  4. सुश्री प्रादिशा दवे
  5. सुश्री कनक खंडेलवाल
  6. डॉ. सतीश शुक्ला
  7. प्रो. प्रीत जैन
  8. डॉ. अनु उकांडे
  9. डॉ. श्वेता केशवानी
  10. प्रो. राहुल गंगराड़े
सत्र रिपोर्टिंग:
  1. डॉ. गीता नायक
  2. डॉ. अमित गुप्ता
  3. प्रो. प्रिया शुक्ला
  4. डॉ. सतीश पटेल
  5. डॉ. सीमा उइके
  6. डॉ. नम्रता चौहान
  7. श्रीमती प्रियंका मोहिते
प्रदर्शनी समिति:
  1. डॉ. बबिता कड़किया
  2. डॉ. सुधा जैन
  3. प्रो. भावेश जोशी
  4. श्री श्रीराम यादव
  5. श्री आलोकजी होलकर
  6. श्रीमती रश्मि पाण्डे
  7. श्री देवराज दिसौदिया
भोजन समिति:
  1. डॉ. गोविन्द सिंघल
  2. डॉ. ज्योति वर्मा
  3. डॉ. अनुराग जोशी
  4. प्रो. विजय आचार्य
  5. डॉ. मनन लुनावत
आवास समिति:
  1. डॉ. अखिलेश द्विवेदी
  2. डॉ. प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री
  3. डॉ. पवनदीप शुक्ला
  4. डॉ. जीतेन्द्र असाटी
  5. डॉ. श्वेता अग्रवाल
  6. डॉ. अजय छाबरिया
  7. डॉ. रीना गुप्ता
  8. डॉ. श्याम बुरहानपुरकर
  9. डॉ. नीतू कटारिया
  10. प्रो. सनी बग्गा
  11. प्रो. अलका करकेट्टा
यातायात व्यवस्था :
  1. श्री दीपक यादव
  2. श्री अर्जुन गुप्ता
  3. श्री करण गुप्ता
  4. श्री यशवंत गोयल
  5. श्री सुनील वर्मा
  6. डॉ. उपेंद्र गुप्ता
  7. प्रो. विशाल पटेल
  8. प्रो. विमल दीक्षित
  9. श्री योगेश राठौड़
कार्यालय समिति:
  1. डॉ. उदय चिटनीस
  2. सी.ए. आनंद बर्फा
  3. श्री राजीव श्रीवास्तव
  4. डॉ. नरेश पुरोहित
  5. प्रो. ललित भंवरेला
  6. श्री राजेंद्र प्रसाद सोनी
  7. श्री अवधेशजी यादव
  8. डॉ. प्राची मिश्रा
  9. श्री मनोहर हरोड़े
  10. श्री अनूप व्यास